रायपुर: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत एम्स रायपुर और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से अनुसूचित क्षेत्रों में सिकलसेल बीमारी का स्क्रीनिंग कर उपचार करने के लिए पुख्ता उपाय किए जाएंगे। सिकलसेल के स्क्रीनिंग व उपचार के लिए वार्षिक कार्ययोजना पर विचार मंथन किया गया। इसके लिए मितानिनों के सहयोग से डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग करने पर भी सहमति बनी। आदिम जाति, अनुसूचित जाति एव पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में सेंटर आफ कम्पीटेंस की स्थापना हेतु गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल बीमारी की रोकथाम, उपचार, काउंसलिंग, जनजागरण हेतु वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत राज्य में सिकलसेल बीमारी की रोकथाम के संबंध में भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सीओसी की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन के लिए क्रियान्वयन एजेंसी के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। इसी प्रकार निर्धारित एजेंसी द्वारा किये जाने वाले स्थापना कार्य की मॉनिटरिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा तथा सीओसी की स्थापना हेतु राशि का अंतरण आयुक्त सह संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं को किये जाने पर सहमति बनी।

समिति की बैठक में योजना-मिशन के क्रियान्वयन में योगदान देने हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा विषय विशेषज्ञ (मैदानी स्तर) का चयन कर नामांकित कर प्रस्ताव विभाग को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसी तरह भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थापना सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया।
राज्य स्तरीय समिति की बैठक में सचिव स्वास्थ्य सेवाएं श्री अमित कटारिया, आयुक्त आदिम जाति विकास डॉ. सारांश मित्तर, प्रोफेसर ई.महापात्रा, विभागाध्यक्ष एससीयू एम्स रायपुर, सिकलसेल प्रभाग के नोडल अधिकारी डॉ. अभ्युदय तिवारी, डॉ. मेनका चंद्राकर डिप्टी कमिश्नर, डॉ. अस्मिता बेहरा राज्य सलाहकार ब्लड बैंक रायपुर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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