रायपुर: छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) के बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा 29वें राष्ट्रीय सप्ताह अभियान के अंतर्गत “सिकल सेल डिज़ीज़” की जानकारी एवं उपचार हेतु विशेष शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार तथा सिकल सेल रोग की जाँच, निदान और उपचार पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सिकलिंग एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बदल जाता है। इससे खून में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है और रोगी को थकान, कमजोरी, बार-बार संक्रमण, तथा गंभीर स्थिति में अंगों के नुकसान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों ने बताया कि समय पर निदान और उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही रोगियों को परामर्श दिया गया कि नियमित जाँच कराते रहें और उचित उपचार लेते रहें। यह शिविर प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ और लोगों में जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य सफल रहा सिकलिन जांच शिविर के अंतर्गत कुल 44 व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें 41 महिलाएँ और 03 पुरुष शामिल थे।
जांच के दौरान कुल 35 महिलाओं में एनीमिया के लक्षण पाए गए। इनमें से 09 महिलाओं को तत्काल दवाइयाँ वितरित की गईं तथा उन्हें आवश्यक परामर्श प्रदान किया गया।इस जांच शिविर का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना और सिकलिंग जैसी गंभीर समस्या की रोकथाम करना रहा।
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