मुंबई/रायपुर
38वीं नेशनल पेंटाथलाॅन गेम्स का आयोजन 8 फरवरी से 14 फरवरी तक उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ मार्डन पेंटाथलाॅन एसोसिएशन के तीन वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों का चयन इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए किया गया है।
सुनील कुमार पाल, दिलीप कुमार विश्वकर्मा और प्रमोद सिंह ठाकुर इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञों के रूप में निर्णायक मंडल में शामिल किए गए हैं।
पेंटाथलॉन गेम्स प्राचीन ग्रीस में दर्ज किया गया था और यह प्राचीन ओलंपिक खेलों का हिस्सा हुआ करता था। प्राचीन ओलंपिक पेंटाथलॉन के लिए एक दिन में पाँच इवेंट लड़े जाते थे , जिसमें लंबी कूद , भाला फेंकना और डिस्कस फेंकना शामिल था , उसके बाद स्टेडियन (एक छोटी पैदल दौड़) और कुश्ती होती थी। यह 19वीं सदी के अंत में एक सैनिक द्वारा आवश्यक कौशल पर केंद्रित था, जिसमें शूटिंग, तैराकी, तलवारबाजी , घुड़सवारी और क्रॉस कंट्री दौड़ की प्रतियोगिताएँ होती थीं। आधुनिक पेंटाथलॉन का एक प्रमुख पहलू अंक प्रणाली है, जिसके तहत प्रत्येक प्रतियोगी को प्रत्येक विशिष्ट स्पर्धा में उसके प्रदर्शन के आधार पर एक निश्चित संख्या में अंक दिए जाते हैं। कुल मिलाकर विजेता वह प्रतियोगी होता है जिसके पाँचों पेंटाथलॉन स्पर्धाओं के अंत में सबसे अधिक अंक होते हैं।
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