नई दिल्ली । भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 2024 में मंदी का सामना करते हुए भी वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर अपनी प्रतिष्ठा कायम रखी है। इस क्षेत्र में हालात में 33 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे वित्त पोषण में 1.9 अरब डॉलर की कमी आई है। एक मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक प्रतिकूलताओं और व्यापक मंदी के कारण इस क्षेत्र में वित्त पोषण में कमी आई है। इसके बावजूद, भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 2024 में सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन के पीछे रहकर तीसरी पोजीशन बनाए रखी है। कंपनी की सह-संस्थापक ने कहा कि भारत का वित्तीय प्रौद्योगिकी परिदृश्य मजबूत है और मंदी के बावजूद यह क्षेत्र भले ही कठिनाइयों का सामना कर रहा हो, लेकिन उसकी फलने-फूलने की क्षमता को रेखांकित करता है। वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 2024 में दो नए ‘यूनिकॉर्न’ कंपनियाँ उभरी हैं, जिनका मूल्यांकन अरब डॉलर के ऊपर है, आठ आईपीओ आए जो 2023 के दो आईपीओ की तुलना में 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगस्त में फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (एफएसीई) को स्व-नियामक संगठन (सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन) का दर्जा दिया, जो देश में डिजिटल लोन देने वाले लगभग 80 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली बॉडी है।
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