महाभारत में माता कुंती और गांधारी के बाद द्रौपदी ही ऐसी स्त्री थीं. जिसका जिक्र आज भी महाभारत का नाम लेते समय किया जाता है. द्रौपदी को सबसे सुंदर स्त्रियों में से एक माना जाता था, वे ना सिर्फ सुंदर थी बल्कि साबसी, बुद्धिमानी के साथ-साथ हाजिरजवाब भी थीं. लेकिन क्या आपको पता है कि द्रौपदी में भले ही ये सभी गुण थे, लेकिन 3 बड़े अवगुण भी थे.
जी हां, द्रौपदी के इन 3 अवगुणों के बारे में युधिष्ठिर ने अपने भाईयों को बताए थे. उन्होंने ये अवगुण तब बताए जब पांचों भाई अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ स्वर्ग जाने के लिए निकले थे. हमेशा सत्य व धर्म के मार्ग चलने वाले युधिष्ठिर को आज भी धर्मराज कहा जाता है, वे पांडवों में सबसे बड़े भाई थे. कि आखिर द्रौपदी में वे कौन से 3 अवगुण थे जो कि युधिष्ठिर ने अन्य पांडवों को बताए थे.
द्रौपदी के अवगुणों को युधिष्ठिर ने कब बताया
महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब पांडव व द्रौपदी सशरीर स्वर्ग की कठिन यात्रा कर रहे थे तो इस यात्रा में जैसे ही पांडव बद्रीनाथ पहुंचे तो वहां से आगे का रास्ता द्रौपदी के लिए कष्टकारी हो गया और वह कुछ दूर चलते ही मूर्छित होकर गिर पड़ी. तभी युधिष्ठिर ने बताया कि उनमें कौन से दुर्गुण थे, जिनकी वजह से वह स्वर्ग यात्रा पूरी नहीं कर पाईं.
द्रौपदी का पहला अवगुण बताते हुए युधिष्ठिर ने कहा कि द्रौपदी को अपने रुपवती और बुद्धिमती होने का बहुत अहंकार था. वहीं किसी भी चीज का अहंकार इंसान को दुर्गुणी बनता है.
दूसरा अवगुण बताते हुए युधिष्ठिर ने कहा कि, द्रौपदी अपने अपने सभी पतियों से समान रुप से प्रेम नहीं किया था. वे अर्जुन से बेहद प्रेम करती थीं. किसी एक के प्रति झुकाव होना समान ना रहना भी एक अवगुण है.
तीसरा अवगुण उनका हठी होना बताया, इसी कारण उन्होंने दुर्योधन से बदला लेने की सौगंध खाई और फिर महाभारत का युद्ध हुआ जिसमें करोड़ों लोगों की हत्या हुई.
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