विदुर धृतराष्ट्र और पांडु के भाई थे. लेकिन दासी पुत्र होने की वजह से उन्हें वैसा सम्मान नहीं मिला जो कि हस्तिनापुर में उन्हें मिलना चाहिए था. हालांकि, विदुर की बुद्धिमत्ता और सूझ-बूझ पांडु, धृतराष्ट्र से कई ज्यादा आगे थी. इसलिए उन्हें हस्तिनापुर के प्रधान मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया था. क्योंकि उनकी नीतियां राज्य को चलाने के लिए बहुत ही कारगार थी.
विदूर की नीतियां ना केवल राज्य के लिए बल्कि आज के समय में भी मानव जीवन के लिए भी बहुत जरुरी मानी जाती है. विदुर ने ही विदु नीति की रचना की, जिसमें कई ऐसी नीतियों के बारे में बताया गया है जो कि व्यक्ति को गलत रास्ते पर जाने से रोकती हैं. इसके साथ ही आपको बता दें कि विदुर नीति में जीवन, मृत्यु से जुड़े भी कई सूत्र बताए गए हैं. तो आइए जानते हैं विदुर नीति के अनुसार उन 5 बातों के बारे में जो कि मृत्यु के करीब ले जाती हैं.
जरूरत से ज्यादा बोलना
जो व्यक्ति जरुरत से ज्यादा बोलता है विदुर नीति के अनुसार, ऐसे व्यक्ति खुद ही मुश्किलों को न्योता दे देते हैं. क्योंकि ज्यादा बोलने वाले व्यक्ति के मुंह से कई बार ऐसे शब्द निकल जाते हैं जो कि दूसरों के मन में घाव की तरह वार कर देते हैं, जिसके कारण उनके द्वारा निकली गई आह आपके लिए अच्छी नहीं होती.
क्रोध करना
अगर कोई व्यक्ति ज्यादा गुस्से वाला होता है तो ऐसे लोगों के बारे में विदुर नीति कहती है कि अधिक क्रोधी व्यक्ति अपनी उम्र खुद ब खुद कम कर लेता है. क्योंकि क्रोध में आया हुआ व्यक्ति कभी सही-गलत में समझ नहीं कर पाता है. हालांकि इस बारे में एक कहावत भी है कि- ‘क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है’.
लालच
लालची व्यक्ति कभी भी अपने जीवन में सफल नहीं हो पाता है. इसके साथ ही लालच करने वाला व्यक्ति खुद को मृत्यु के करीब ले जाता है. क्योंकि अपने लालच में वह कब क्या कर दे इसका कोई भरोसा नहीं होता है. इसके अलावा हम सभी ने अकसर सुना और पढ़ा हुआ है कि लालच बुरी बला है.
खुद की तारीफ करना
विदुर नीति के अनुसार, व्यक्ति को कभी अपने मुंह से खुद की तारीफ नहीं करनी चाहिए. क्योंकि खुद की प्रशंसा करने वाले लोग और दूसरों की निंदा करने वाले लोग अकसर अपने दुश्मनों को बना लेते हैं. व्यक्ति की ये आदतें उनको मृत्यु के करीब ले जाती है.
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