चीन ने मंगलवार को कहा कि वह साम्यवादी चीन (पीआरसी) की स्थापना की 75वीं सालगिरह पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अपने चीनी समकक्ष शी चिनफिंग को लिखे गए पत्र को ‘महत्वपूर्ण’ मानता है।
उसने साथ ही कहा कि चीन द्विपक्षीय संबंधों के सुदृढ़ और स्थिर विकास को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने साम्यवादी चीन की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर 27 सितंबर को शी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और स्थिर संबंधों की दिशा में काम करें।’’
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘चीन-भारत संबंधों पर राष्ट्रपति मुर्मू की टिप्पणी को चीन महत्व देता है।’’ उन्होंने संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हम राष्ट्रपति मुर्मू के पत्र के लिए अपनी ओर से सराहना करते हैं।’’
माओ ने कहा, ‘‘हम भारत के साथ संवाद बढ़ाने, आपसी विश्वास बढ़ाने तथा चीन-भारत संबंधों के सुदृढ़ एवं स्थिर विकास को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं।’’ चार साल से पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य गतिरोध के समाधान के लिए की जा रही बातचीत में प्रगति के बारे में पूछे जाने पर माओ ने कहा, ‘‘चीन और भारत कूटनीतिक और सैन्य माध्यम से सीमा क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर निकट संवाद बनाए रखते हैं, और दोनों देशों ने गलवान घाटी सहित पश्चिमी क्षेत्र में चीन-भारत सीमा के चार इलाकों से सैनिकों को पीछे हटा लिया है।’’
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर मौजूदा समय में स्थिति कुल मिलाकर स्थिर है। उन्होंने कहा, ‘‘चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की हाल ही में हुई 31वीं बैठक में दोनों पक्षों ने मतभेदों को और कम किया, आम समझ को बढ़ाया और सीमा पर स्थिति का शीघ्र समाधान खोजने पर सहमति जताई।’’
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