कोलंबो । आर्थिक संकटों से उबर रहे श्रीलंका में अब नई वामपंथी सरकार बन गई है। अगले राष्ट्रपति के रूप में अनुरा कुमारा दिसानायके ने सोमवार को शपथ ली। उन्हें देश के मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने राष्ट्रपति सचिवालय में शपथ दिलाई गई। अपने भाषण में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण के लिए धन्यवाद किया।
56 वर्षीय डिसानायके ने कहा, मैं आश्वासन देता हूं कि मैं लोकतंत्र की रक्षा और राजनेताओं की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए काम करूंगा, क्योंकि लोगों को उनके आचरण पर संदेह है। उन्होंने जोर दिया कि श्रीलंका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है और वह कोई जादूगर नहीं हैं, बल्कि एक सामान्य नागरिक हैं। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति ने कहा, मेरा पहला काम लोगों की प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल कर देशहित में फैसले लेने का होगा। मैं इस पूरी जिम्मेदारी में अपना योगदान देना चाहता हूं।
दिसानायके की जीत श्रीलंका के लिए एक अहम मोड़ है। उन्होंने समागी जना बलावेगया (सीजेबी) के सजिथ प्रेमदासा को हराकर राष्ट्रपति चुनाव जीता है। चुनाव में किसी भी दावेदार को 50 फीसदी वोट नहीं मिले थे और इसकारण वोटों की गिनती फिर करनी पड़ी और फिर दिसानायके की जीत पर मुहर लगी। दिसानायके खासतौर पर युवाओं ने अच्छा-खासा मतदान किया है, जो लंबे समय से सत्ता में बदलाव की मांग कर रहे थे।
दिसानायके को चुनाव में 5.74 मिलियन वोट मिले, जबकि प्रेमदासा को 4.53 मिलियन वोट मिले। दिसानायके की पार्टी जेवीपी करीब 50 साल पुरानी पार्टी है लेकिन पार्टी अब तक मार्जिन पर ही रही है, और वह अपनी पार्टी के पहले नेता हैं, जिन्होंने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है।
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