भगवान गणेश जी को दूर्वा (दूब) बहुत पसंद है. दूर्वा का बिना गणेश जी की पूजा अधूरी मानी जाती है, गणेश जी को दूर्वा अर्पित करते समय ऊँ गं गणपतये नमः: मंत्र का जाप करना चाहिए. पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि कश्यप के द्वारा दूर्वा देने से गणेश जी की पेट जलन में शांति मिली थी, तब से भगवान गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है.
गणेश उत्सव के दौरान, लाल रंग का उपयोग विशेष महत्व रखता है. श्री गणेश जी को लाल गुड़हल (मदार) का फूल चढ़ाना चाहिए, क्योंकि गणेश जी की पूजा में लाल रंग के प्रयोग का महत्व अत्यधिक है. लाल रंग शुभ और मंगलकारी माना जाता है, जो गणेश जी के भक्तों के लिए सौभाग्य और समृद्धि दायक है. विशेष रूप से लाल गुड़हल का फूल गणेश जी को अत्यधिक प्रिय होता है, इसलिए इसे पूजा में अर्पित करना शुभ माना जाता है. भगवान गणेश को लाल रंग अत्यंत प्रिय है, जो सौभाग्य, उत्साह, साहस और जीवन का प्रतीक माना जाता है, गणेश पुराण के अनुसार, गणेश जी ने बाल्यकाल में सिंदूर नामक एक असुर का संहार किया था, इस युद्ध के बाद गणेश जी ने उस असुर के रक्त को अपने शरीर पर लगाया था, जिससे लाल रंग का विशेष महत्व उत्पन्न हुआ. इसी कारण से गणपति महाराज को लाल सिंदूर और लाल रंग विशेष रूप से प्रिय हो गए, गणेश जी को लाल रंग का सिंदूर चढ़ाया जाता है. हिन्दू धर्म में सिंदूर को मंगल यानी शुभता का प्रतीक भी माना जाता है. गणेशजी को मोदक या लड्डू का नैवेद्य अच्छा लगता है. गणेश पूजा के अवसर पर मोदक के लड्डू बनाए जाते हैं. मोदक के अलावा गणेशजी को मोतीचूर के लड्डू भी पसंद हैं. शुद्ध घी से बने बेसन के लड्डू भी पसंद हैं. इसके अलावा आप उन्हें बूंदी के लड्डू भी अर्पित कर सकते हैं. भगवान गणेश जी को आटे का भुना पंजीरी और उसमें शक्कर मिश्रित करके भोग लगाएं. नारियल तोड़ें और उसका भोग लगाएं तो भगवान गणेश जी बहुत प्रसन्न होते हैं. पंजीरी का प्रसाद घर में गेहूं आटे को भूनकर और शक्कर डालकर आसानी से बनाया जा सकता है. पंजीरी का प्रसाद गणेश जी को अतिप्रिय है.
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