मुंबई । कैलाश खेर जिनके गाने सुनते ही लोगों झूमने लगते हैं। लाखों लोगों को अपने गानों से दीवाना बनाने वाले कैलाश खेर का जीवन एक समय अंधकार से घिरा हुआ था। तब वह इतने निराश और परेशान हो थे कि उन्होंने हारकर अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला कर लिया था, लेकिन वह कहते हैं ना जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।
कैलाश खेर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैलाश को गायकी विरासत में मिली है। उन्होंने अपने पिता से म्यूजिक ट्रेनिंग ली और गाना शुरू किया। वह 14 साल की उम्र में एक सपना लिए घर से निकल पड़े थे। घर छोड़ते ही संघर्ष का सफर शुरू हो गया। कैलाश की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती थीं। 20-21 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते कैलाश ने गाना छोड़ दिया और एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया, लेकिन उनकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कैलाश का बिजनेस डूब गया जिससे वह डिप्रेशन में चले गए उनको डिप्रेशन ने कुछ इस तरह जकड़ा कि वह अपनी जान तक देने की कोशिश की। खुदकुशी करने के लिए कैलाश नदी में कूद गए, लेकिन बच गए। 2001 में कैलाश मुंबई आ गए और यहीं से उनकी जिंदगी की नई शुरुआत हुई। उन्होंने विज्ञापनों के लिए जिंगल्स लिखने से करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे गाना गाने लेगे। उन्हें उनका पहला ब्रेक ‘रब्बा इश्क न होवे’ गाने से मिला। उसके बाद वह कई हिट गाने गाते चले गए।
कैलाश का गाना ‘अल्लाह के बंदे’ बेहद मशहूर हुआ था और इस गाने ने ही फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें स्टार बना दिया। आज कैलाश खेर अपने अलग तरह के गानों के लिए जाने जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि उनकी आवाज और उनके गाने आज भी जमीन से जुड़े हुए हैं। आज कैलाश का फिल्म इंडस्ट्री में दबदबा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कैलाश एक गाना गाने के 10 लाख से लेकर 20 लाख तक लेते हैं. उनका नेटवर्थ 292 करोड़ रुपए है।
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