तीसरी बार केंद्र में सरकार बनने के बाद बीजेपी सबसे पहले आपातकाल के मुद्दे पर ही कांग्रेस को घेर रही है।
इस मामले को लेकर संसद में भी खूब हंगामा हुआ है। वहीं अब आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि आपतकाल लोकतंत्र के इतिहास का धब्बा जरूर है लेकिन उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें कभी गाली नहीं दी।
उन्होंने उनके साथ ही कई नेताओं को जेल में डलवा दिया लेकिन इंदिरा गांधी और उनके मंत्रियों ने ना कभी उन्हें देशद्रोही कहा और ना ही देशभक्ति पर सवाल खड़े किए।
लालू यादव ने सोशल मीडिया पर अपने एक आर्टिकल ‘द संघ साइलेंस ऑन 1975’ की स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि वह जयप्रकाश नारायण की स्टीयरिंग कमिटी के संयोजक थे। उनपर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी थी।
उन्हें मीसा के तहत 15 महीने तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा, हमने और हमारे साथियों ने उन लोगों का कभी नाम भी नहीं सुना था जो कि आज आपातकाल पर लेक्चर दे रहे हैं।
ना तो हमने उस दौरान मोदी का नाम सुना और ना ही जेपी नड्डा का। वहीं प्रधानमंत्री के कुछ और मंत्री भी स्वतंत्रता को लेकर भाषण दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, इंदिरा गांधी ने हमें जेल में डलवा दिया लेकिन कभी गाली नहीं दी। उन्होंने और उनके मंत्रियों ने कभी देशद्रोही नहीं कहा।
उन्होंने कभी संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान नहीं किया। निश्चित तौर पर 1975 लोकतंत्र का काला धब्बा है लेकिन उन लोगों को भी भुलाया नहीं जा सकता जो 2024 में विपक्ष का सम्मान नहीं कर रहे हैं।
लालू यादव के इस बयान को लेकर बीजेपी नेता निखिल आनंद ने कहा, लालू प्रसाद यादव के आपातकाल को लेकर नए विश्लेषण पर दिवंगत जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया को भी बहुत दुख हो रहा होगा।
लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक जीवन लगभग खत्म हो चुका है। अब वह अपने परिवार की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। वह आखिर इतने निचले स्तर पर कैसे चले गए।
बता दें कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित कर दिया था। यह आपातकाल 21 महीने चला।
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